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3 महीने में ये बिजनेस कराएगा 2 लाख तक कमाई...

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ईसबगोल की फायदेमंद खेती   (कामेश सूर्यवंशी )# 9691160601   FARMING EXPERT बिजनेस करने के लिए आप अगर किसी आइडिया की तलाश में है तो मेडिसिनल प्‍लांट फार्मिंग से जुड़ा बिजनेस भी आपके लिए अच्‍छा मौका हो सकता है। इन्‍हीं में से एक है इसबगोल खेती और इससे जुड़ा बिजनेस। इसमें आप शुरुआत में 10 से 15 हजार रुपए इन्‍वेस्‍टमेंट करने पर आप केवल तीन महीने 2 से 2.5  लाख रुपए तक कमा सकते हैं। इनकम का यह स्‍तर सिर्फ 1 हेक्‍टेयर कृषि भूमि के आधार पर है। यानी इसके लिए  आपके पास एक हेक्टेयर जमीन होना जरूरी है।  यदि आप ज्‍यादा खेती कर सकते हैं तो इनकम का यह आंकड़ा कई गुना तक हो सकता है। ...   80 फीसदी बाजार पर है भारत का कब्‍जा   ईसबगोल एक मेडिसिनल प्‍लांट है। इसके बीज तमाम तरह की आयुर्वेदिक और एलोपैथिक दवाओं में इस्‍तमाल होता है। विश्‍व के कुल उत्‍पादन का  लगभग 80 फीसदी सिर्फ भारत में ही पैदा होता है। इसकी खेती शुरूआत में राजस्‍थान   और गुजरात में होती थी। लेकिन, अब उत्‍तर भारत के राज्‍यों हरियाणा, उत्‍तर प्रदेश, पंजाब और उत्‍तराखंड में ही यह बड...

एलोवेरा का करें बिजनेस, 50 हजार इन्वेस्ट कर 10 लाख तक कमाने का मौका...

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औषधीय फसल एलोविरा की खेती केसे करे इसके बारे में जानेंगे (कामेश सूर्यवंशी @9691160601) एलोवीरा का पोधा परिचय:- एलोविरा की उत्त्पति का स्थान उत्तरी अफ्रीका माना जाता है।इसे कई नामो से जाना जाता है। जैसे घृतकुमारी, ग्वारपाटा, अग्रेजी में एलॉय नाम से भी जाना जाता है। ग्वारपाटा के पोधे की ऊचाई 60- 90 से.मी.तक होती है। पत्तो की लम्बाई 30-45 सेमी. तक होती है। पत्ते 4.5सेमी से 7.5सेमी तक होते है। जड़ से उपर सतह के साथ ही पत्ते निकलने लगते है। पत्तो का रंग हरा होता है। और पत्तो की किनारों पर छोटे छोटे काटे जैसे होते है। अलग अलग रोगों के हिसाब से इसकी कई सारी प्रजातिया है। एलोवीरा का उपयोग:-  Aloevera में कई सारे औषधीय गुण होते है।इसलिए इसका उपयोग आयुवेदिक में बड़े पैमाने से होता आ रहा है। आज के दोर में कई सारी नेशनल और इंटर नेशनल कंपनियाँ इसका उपयोग चिकित्सा के साथ साथ सौंदर्य प्रसाधन के जैसे फेसवास क्रीम शेम्पू  दन्त पेस्ट अन्य कई सारे product में इसका इस्तेमाल होता है।इसलिए इसकी मांग बडने लगी है। यह पोधा गमले में भी अच्छी तरह से चलता है। मैने भी इसे अपने घर पर ल...

ऑनलाइन बिज़नस 2017

स्वागत है दोस्तों,  आज मैं आप को  ऑनलाइन बिज़नस के बारे में बताऊंगा. वैसे तो ऑनलाइन बिज़नस के बारे में Internet में बहुत Articles है. But वो सभी English में मौजूद है. इस कारन हम हिंदी भाषी लोगों को उसे समझने में परेशानी होती है, और हमें पता ही नहीं चल पाता ऑनलाइन बिज़नस के बारे में. और हम Indian लोग Internet की दुनिया में अपनी पहचान बनाने में पीछे हो जाते है. इसलिए मैंने Internet में ऑनलाइन बिज़नस के बारे में काफी Research किया. और जो जानकारियां मुझे मिली, उसे मैं आप सभी को बताना चाहूंगा. वैसे मैं आप को बता दूँ मैं भी ऑनलाइन बिज़नस करता हूँ. वैसे तो ऑनलाइन बिज़नस आइडिया  बहुत है. पर बहुत से Online Website पर Only Fake बातें होती है. और वो बस पैसा देने का वादे करते है. पर वो देते नहीं है, उल्टा हमसे ही Register करने के पैसे वसूल लेते है. और परिणाम सिर्फ असफलता ही होता है. पर दोस्तों सिक्के के दो पहलू होते है.Online कमाई के बहुत से और भी Website है, और Idea भी,चलो अब मैं आप को एक -एक कर सभी तरीकों के बारे में बताता हूँ. वैसे तो ऑनलाइन बिज़नस बहुत से है. पर मैं आप को जो...

गुलाब की खेती

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गुलाब की खेती से कमा सकते हैं मोटा मुनाफा  गुलाब की खेती करके किसान अच्छा लाभ कमा सकते हैं। फूलों की बढ़ती मांग और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में बड़ी फूल मंडी उपलब्ध होने से इनकी बिक्री की कोई समस्या नहीं है। जैसे फलों का राजा आम है तो फूलों की बेगम गुलाब है। गुलाब का रंग व सुगंध सबके मन को मोह लेते हैं। गुलाब के फूलों से गुलकंद, गुलाब जल, तेल, इत्र, जैम, जैली पेय पदार्थ बनाए जाते हैं। फूलों की डंडी व गुलदस्ते बड़े पसंद किए जाते हैं। नवीनतम तकनीक से गुलाब की अच्छी पैदावार ली जा सकती है l  गुलाब की खेती बहुत पहले से पूरी दुनिया में की जाती हैI इसकी खेती पूरे भारतवर्ष में व्यवसायिक रूप से की जाती हैI गुलाब के फूल डाली सहित या कट फ्लावर तथा पंखुड़ी फ्लावर दोनों तरह के बाजार में व्यापारिक रूप से पाये जाते हैI गुलाब की खेती देश व् विदेश निर्यात करने के लिए दोनों ही रूप में बहुत महत्वपूर्ण हैI गुलाब को कट फ्लावर, गुलाब जल, गुलाब तेल, गुलकंद आदि के लिए उगाया जाता हैI गुलाब की खेती मुख्यतः कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्रा, बिहार, पश्चिम बंगाल ,गुजरात, हरियाणा, पंज...

मशरूम खेती

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मशरूम उत्पादन : रोजगार का साधन मशरूम विशेष प्रकार की फफूंदों का फलनकाय है, जिसे फुटु, छत्तरी, भिभौरा, छाती, कुकुरमुत्ता, ढिगरी आदि नामों से जाना जाता है। मशरूम खेतों में, मेढ़ों में, वनों में प्राकृतिक रूप से विभिन्न प्रकार के माध्यमों में निकलते है। इनमें खाद्य, अखाद्य, चिकित्सीय, जहरीले एव अन्य मशरूम होते है। खाद्य मशरूम ग्रामीणों द्वारा बहुतायत में पसंद किये जाते है। वैज्ञानिकों ने इन जंगली मशरूमों को एकत्र कर प्रयोगशाला में इनके विकास का पूर्णरूपेण अध्ययन किया एवं इनकी उत्पादन विधि विकसित की। आज अनेक प्रकार के मशरूम को न केवल प्रयोगशाला में उगाया जा रहा है, वरन उनकी व्यावसायिक खेती कर उनका निर्यात एवं आयात कर कृषि अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है। मशरूम उत्पादन में भारतवर्ष पिछड़ा है। यहाँ पर मशरूम अनुसंधान एवं उत्पादन वृद्धि दर संतोषप्रद है भारतवर्ष में आज लगभग 1.00 लाख टन मशरूम का उत्पादन हो रहा है, जिसमें 85 प्रतिशत हिस्सा सफ़ेद बटन मशरूम का है। दूसरे क्रम में आयस्टर, पैरा मशरूम एवं दूधिया मशरूम है। मशरूम क्या है? मशरूम “कुकुरमुत्ता” नहीं अपितु फफूंदों का फलनकाय है, जो...

मुर्गीपालन

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मुर्गीपालन ब्यवसाय एक ऐसा व्यवसाय है जो आपकी आय का अतिरिक्त साधन बन सकता है। बहुत कम लागत से शुरू होने वाला यह व्यवसाय लाखों-करोड़ों का मुनाफा दे सकता है। इसमें शैक्षणिक योग्यता और पूंजी से अधिक   अनुभव और मेहनत की दरकार होती है. आज के समय में बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है। ऐसे में युवा मुर्गीपालन को रोजगार का माध्यम बना सकते हैं ।        अगर आपके पास औरों से अलग सोचने की क्षमता है, तो आप मुर्गीपालन ब्यवसाय से भी करोड़ों का मुनाफा कमा सकते हैं। मुर्गीपालन ब्यवसाय एक ऐसा व्यवसाय है जिसे बहुत कम लागत से शुरू करके लाखों- करोड़ों रुपए का लाभ कमा सकते हैं। सुगुना पोल्ट्री के बी सौदारराजन और जीबी सुंदरराजन का उदाहरण सबके सामने है। इन्होंने मुर्गीपालन ब्यवसाय के बहुत छोटे से अपनी शुरुआत की और देखते ही देखते उनका यह मुर्गीपालन ब्यवसाय 4200 करोड़ की कंपनी में बदल गया। और तो और इस कंपनी ने 18 हजार किसानों को भी आय का बेहतर अवसर प्रदान किया। भारत में पोल्ट्री की शुरुआत मुख्यतया 1960 से हुई। पिछले तीन दशकों में मुर्गीपालन ब्यवसाय ने उद्योग का रूप ले लिया है। ...